आत्मोत्थान सर्वोपरि: आध्यात्मिक मार्ग के 9 आईआईटी अभियंता पथिक
कॉर्पोरेट सफलता से आत्मिक शांति की ओर प्रेरक यात्रा
स्वामी मुकुंदानंद (आई आई टी दिल्ली, परिवर्तन वर्ष 1985, तत्कालीन आयु ~25 वर्ष)
कॉर्पोरेट जीवन की संभावनाओं से भरे युवा मुकुंदानंद जी ने आई आई टी दिल्ली और आईआईएम कोलकाता से शिक्षा प्राप्त की थी। लेकिन उनके भीतर एक गहरी पुकार थी—एक ऐसी पुकार जो उन्हें योग, ध्यान और आत्मिक सेवा की ओर खींच रही थी। 1985 में उन्होंने सब कुछ छोड़कर सन्यास लिया और जेकेयोग की स्थापना की। आज वे अमेरिका और भारत में हजारों लोगों को जीवन के संतुलन और आत्मिक विकास का मार्ग दिखा रहे हैं।
गौरांग दास (आई आई टी मुंबई, परिवर्तन वर्ष 1993, तत्कालीन आयु ~22 वर्ष)
गौरांग दास जी ने आई आई टी मुंबई से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी। लेकिन उनका मन भक्ति की ओर आकर्षित था। 1993 में उन्होंने इस्कॉन से जुड़कर कृष्ण भक्ति को अपना जीवन बना लिया। उन्होंने भक्ति को पर्यावरणीय सेवा से जोड़ा और सतत विकास की कई परियोजनाओं का नेतृत्व किया। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि आध्यात्मिकता केवल ध्यान नहीं, बल्कि सक्रिय सेवा भी है।
खुरशेद बटलीवाला (आई आई टी मुंबई, परिवर्तन वर्ष 1993–94, तत्कालीन आयु ~24 वर्ष)
गणित में गहराई से जुड़े खुरशेद जी ने आई आई टी मुंबई से मास्टर्स किया। लेकिन उनका हृदय संगीत, संवाद और सेवा की ओर झुका हुआ था। 1993–94 में उन्होंने आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़कर युवाओं को तनावमुक्त जीवन की ओर प्रेरित करना शुरू किया। आज वे एक वरिष्ठ प्रशिक्षक हैं, जो मानसिक स्वास्थ्य, नेतृत्व और रचनात्मकता के माध्यम से समाज को दिशा दे रहे हैं।
आचार्य प्रशांत (आई आई टी दिल्ली, परिवर्तन वर्ष 2006–08, तत्कालीन आयु ~30 वर्ष)
प्रशांत त्रिपाठी जी ने आई आई टी दिल्ली और आईआईएम अहमदाबाद से शिक्षा प्राप्त की और सिविल सेवा में कार्यरत थे। लेकिन उनके भीतर एक बेचैनी थी—एक प्रश्न जो उन्हें अद्वैत वेदांत की ओर ले गया। 2006–08 के बीच उन्होंने सब कुछ छोड़कर अद्वैत लाइफ फाऊंडेशन की स्थापना की। आज वे अपने गहन संवाद, पुस्तकों और डिजिटल शिक्षण के माध्यम से लाखों लोगों को आत्म-जागरूकता का मार्ग दिखा रहे हैं।
महान महाराज (आई आई टी कानपुर, परिवर्तन वर्ष 2008, तत्कालीन आयु ~30 वर्ष)
आई आई टी कानपुर और यू सी बर्कले से गणित में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद, महान महाराज जी ने 2008 में रामकृष्ण मिशन में सन्यास लिया। उनका जीवन विज्ञान और अध्यात्म के बीच सेतु बन गया। वे आज TIFR में प्रोफेसर हैं और साथ ही एक सन्यासी के रूप में साधना में रत हैं। उनका मार्गदर्शन युवा वैज्ञानिकों को आत्मिक संतुलन की ओर प्रेरित करता है।
रसनाथ दास (आई आई टी दिल्ली, परिवर्तन वर्ष 2008, तत्कालीन आयु ~32 वर्ष)
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से एमबीए करने के बाद रसनाथ दास जी ने बैंक ऑफ अमेरिका में एक सफल करियर शुरू किया। लेकिन 2008 में उन्होंने महसूस किया कि सच्चा नेतृत्व केवल रणनीति नहीं, बल्कि चेतना से आता है। उन्होंने सन्यास लिया और अपबिल्ड संस्था की स्थापना की। आज वे कॉर्पोरेट जगत में आत्मिक नेतृत्व का संदेश फैला रहे हैं।
संकेत पारिख (आई आई टी मुंबई, परिवर्तन वर्ष 2013, तत्कालीन आयु ~29 वर्ष)
संकेत पारिख जी अमेरिका में एक सफल इंजीनियर थे। लेकिन उनके भीतर एक गहरी खोज चल रही थी। 2013 में उन्होंने आचार्य युगभूषण सूरी के सान्निध्य में जैन दीक्षा ली और मुनि बन गए। उनका जीवन नास्तिकता से आस्था की ओर एक साहसी यात्रा है, जो आत्म-शुद्धि और वैराग्य का संदेश देती है।
अविरल जैन (आई आई टी बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, परिवर्तन वर्ष 2019, तत्कालीन आयु ~27 वर्ष)
वॉलमार्ट जैसी कंपनी में उच्च पद पर कार्यरत अविरल जैन जी ने 2019 में जैन दीक्षा ली और मुनि श्री 108 निसंग सागरजी महाराज बने। उनका निर्णय समाज के लिए एक संदेश था—कि संयम, तप और आत्मिक अनुशासन आज भी प्रासंगिक हैं। वे आज जैन समाज में एक प्रेरणास्रोत हैं।
मसानी गोरख (आई आई टी मुंबई, परिवर्तन वर्ष 2023, तत्कालीन आयु ~29 वर्ष)
अभय सिंह, जो आई आई टी मुंबई से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में स्नातक थे, ने 2023 में शिवभक्ति की ओर कदम बढ़ाया। उन्होंने मसानी गोरख नाम धारण किया और सन्यास लिया। 2025 के महाकुंभ में उनकी उपस्थिति ने उन्हें एक आध्यात्मिक प्रतीक बना दिया। वे आज ध्यान, योग और डिजिटल माध्यम से युवाओं को आत्म-खोज की ओर प्रेरित कर रहे हैं।
निष्कर्ष
इन नौ आई आई टी अभियंताओं की कहानियाँ केवल व्यक्तिगत परिवर्तन की नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना की भी हैं। उन्होंने दिखाया कि जीवन का उद्देश्य केवल धन और पद नहीं, बल्कि आत्मिक संतुलन, सेवा और सत्य की खोज भी है। इनकी यात्राएँ हमें यह सिखाती हैं कि जब मनुष्य अपने भीतर उतरता है, तो वह समाज को भी ऊपर उठा सकता है।
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